क्या चंदन की खेती से करोड़ों की कमाई संभव है?

Chandan Ki Kheti Se Kaise Banen Crorepati Indo Essence Agro & Herbs

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चंदन की खेती के नियम

चंदन की खेती को लेकर अधिकांश किसानों में संशय है जैसे.  क्या सरकार द्वारा इस खेती की अनुमति है? क्या बेचना कानूनी है? हम कैसे बेचेंगे? और इस फसल को उगाने के लिए कौन मार्गदर्शन करेगा?

हम यहां पर उन सब प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करेंगे।

देश में साल 2000 से पहले आम लोगों को चंदन को उगाने और काटने की मनाही थी। सात 2000 के बाद सरकार ने अब चंदन की खेती को आसान बना दिया है। अगर कोई किसान चंदन की खेती करना चाहता है तो इसके लिए वह वन विभाग से संपर्क कर सकता है। चंदन की खेती के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। केवल पेड़ की कटाई के समय वन विभाग से  नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है जो आसानी से मिल जाता है।

चंदन की लकड़ी का उपयोग:

चंदन का इस्तेमाल ना केवल हमारे धार्मिक कामों में आता है बल्कि कई तरह के सौंदर्य और मेडिकल प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं. चंदन की लकड़ी से खुशबू के अलावा औषधीय महत्व भी है. इसके तेल से मालिश करने से मांसपेशियों की ऐठन दूर होती है, और इसका तेल मस्तिष्क के कोशिकाओं को उत्तेजित करदिमाग और याददाश्त तेज़ करता है. इसका तेल का दवाओं के अलावा धूपबत्ती, अगरबत्ती, साबुन, परफ्यूम आदि में प्रयोग किया जाता है

प्रजातियां :

पूरे विश्व में चंदन की 16 प्रजातियां है। जिसमें सेंलम एल्बम प्रजातियां सबसे सुगंधित और औषधीय मानी जाती है। इसके अलावा लाल चंदन, सफेद चंदन, सेंडल, अबेयाद, श्रीखंड, सुखद संडालो प्रजाति की चंदन पाई जाती है।

चंदन की खेती के लिए जलवायु :

चंदन पौधों को उगाने के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है. चंदन की खेती 500 से 600 मिमी वार्षिक वाले क्षेत्रों में आसानी से होती है. इसकी खेती के लिए 12°C से 35 °C तापमान वाले क्षेत्र उचित हैं. इसकी खेती बर्फीले और रेगिस्तान वाले इलाकों को छोड़ा लगभग सभी जगहों पर की जा सकती है.

चंदन की खेती के लिए काली मिट्टी, लाल चिकनी मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो उपयुक्त रहती है.

जिन जमीनों की पीएच वैल्यू 4-6 तक है उनकी भूमि में लाल चंदन अच्छी ग्रोथ करता है, इस तरह की भूमि दक्षिण भारत और भारत के पूर्वी भाग में मिलती है। उत्तरी भारत के लिए सफेद चंदन उपयुक्त रहता है, क्यों सफेद चंदन के लिए भूमि का पीएच मान 6.5 ~ 8.5 उन्नत होता है और उत्तर भारत में अधिकार याहि पीएच पाया जाता है। पूर्वी भारत में दो प्रकोप के चंदन का सही विकास होता है।

चंदन की खेती के लिए बेहतर समय :

हालाँकि इसे अत्यधिक ठंड को छोड़कर पूरे वर्ष लगाया जा सकता है फिर भी अप्रैल और मई का महीना चंदन की बुवाई के लिए सबसे अच्छा होता है।

पौधे बोने से पहले 2 से 3 बार अच्छी और गहरी जुताई करना जरूरी होता है। जुताई होने के बाद 2x2x2 फीट का गहरा गड्ढ़ा खोदकर उसे कुछ दिनों के लिए सूखने के लिए छोड़ देना चाहिए।

चंदन के पेड़ को 5 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले इलाके में लगाना सही माना जाता है। एक एकड़ भूमि में औसतन 400 पेड़ लगाए जाते हैं। इसकी खेती के लिए 500 से 625 मिमी वार्षिक औसम बारिश की आवश्यकता होती है। 

चंदन की खेती में पौधरोपण

चंदन का पौधा अद्र्धजीवी होता है। इस कारण चंदन का पेड़ आधा जीवन अपनी जरुरत खुद पूरी करता है और आधी जरूरत के लिए दूसरे पेड़ की जड़ों पर निर्भर रहता है। इसलिए  चंदन का पेड़ अकेले नहीं पनपता है। अगर चंदन का पेड़ अकेला लगाया जाएगा तो यह सूख जाएगा। जब भी चंदन का पेड़ लगाएं तो उसके साथ दूसरे पेड़ भी लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि चंदन के कुछ खास पौधे जैसे बबूल, करंजी,शूरु, देसी नीम लगाने चाहिए जिससे उसका विकास हो सके। 

इन सभी पोधों की पौधरोपण योजना ठीक से होनी चाहिए। सामान्य तौर पर 15×15 या 15×20 फीट पर चांद के पौधे लगते हैं और पंक्ति में समान दुरी पर एक शुरू या बबूल और एक देसी नीम या करंजी लगा सकते हैं।

और हम आपको अब एक और महत्वपूर्ण बात बताना चाहते हैं कि आपको चंदन के पौधे के पास कुछ लाल मेहंदी लगानी चाहिए ~ 2 साल तक आपको रखनी होती है।

चंदन की खेती में खाद प्रबंधन:

चंदन की खेती में जैविक खादकी अधिक आवश्यकता नहीं होती है। शुरू में फसल की वृद्धि के समय खाद की जरुरत पड़ती है। लाल मिट्टी के 2 भाग, खाद के 1 भाग और बालू के 1 भाग को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गाद भी पौधों को बहुत अच्छा पोषण प्रदान करता है।

चंदन की खेती में सिंचाई :

 सिंचाई मिट्टी में नमी और मौसम पर निर्भर करती है। इस पौधे को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं है! इसलिए कम पानी देना चाहिए ! आप पानी साप्ताहिक या १५ दिनों के अंतराल पर दे सकते हैं! इस पौधे के लिए जलजमाव खतरनाक है।

चंदन की खेती में खरपतवार

चंदन की खेती करते समय, चंदन के पौधे को पहले साल में सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। पहले साल में पौधों के इर्द-गिर्द की खरपतवारको हटाना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो दूसरे साल भी साफ-सफाई करनी चाहिए। किसी भी तरह का पर्वतारोही या जंगली छोटा कोमला पौधा हो तो उसे भी हटा देना चाहिए। रसायनों के इस्तेमाल से पौधे की बढ़वार पर विपरीत असर पड़ता है.

चंदन की खेती में कीट एवं रोग नियंत्रण

चंदन की खेती में सैंडल स्पाइक नाम का रोग चंदन के पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। इस रोग के लगने से चंदन के पेड़ सभी पत्ते ऐंठाकर छोटे हो जाते हैं। साथ ही पेड़ टेड़े-मेढ़े हो जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए चंदन के पेड़ से 5 से 7 फीट की दूरी पर एक नीम का पौधा लगा सकते हैं जिससे कई तरह के कीट-पंतगों से चंदन के पेड़ की सुरक्षा हो सकेगी। चंदन के 3 पेड़ के बाद एक नीम का पौधा लगाना भी कीट प्रबंधन का बेहतर प्रयोग है

कीटों की रोकथाम के लिए नीम की खली या बुवेरिया बेसियाना या मेटारिजियम जैसे जैविक उत्पाद का गोबर की खाद के साथ उपयोग किया जा सकता है. रोग नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा जैविक फफूंदनाशी का उपयोग कर सकते हैं.

 चंदन की फसल की कटाई

चंदन का पेड़ जब 15 साल का हो जाता है तब इसकी लकड़ी प्राप्त की जाती है। चंदन के पेड़ की जड़े बहुत खुशबूदार होती है। इसलिए इसके पेड़ को काटने की बजाय जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है। पौधे को रोपने के पांच साल बाद से चंदन की रसदार लकड़ी बनना शुरू हो जाता है। चंदन के पेड़ को काटने पर उसे दो भाग निकलते हैं। एक रसदार लकड़ी होती है और दूसरी सूखी लकड़ी होती है। दोनों ही लकडिय़ों का मूल्य अलग-अलग होता है।

चंदन की खेती में लागत और लाभ :

देश में चंदन की मांग इतनी है कि इसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है। देश में चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि आपूर्ति मात्र 30 प्रतिशत है। वर्तमान में मैसूर की चंदन लडक़ी के भाव 25 हजार रुपए प्रति किलो के आसपास है। इसके अलावा बाजार में कई कंपनियां चंदन की लडक़ी को 10 हजार से 15 हजार रुपए किलो के भाव से बेच रही है। एक परिपक्व (10-12 साल) चंदन के पेड़ से 10-15 किलो लकड़ी प्राप्त की जा सकती है और एक किलो चंदन की कीमत 10-12 हजार तक हो सकती है. इसलिए एक एकड़ में यदि 300 पेड़ भी लगाए तो एक एकड़ खेत से करीब 3 करोड़ रुपए कमाए जा सकते हैं. यह किसी भी बैंक में एफडी और प्रॉपर्टी में निवेश से भी कई गुना ज्यादा आपको लाभ दे सकता है।

विशेष सलाह:

किसानो को सलाह दी जाती है की चंदन जैसी मुल्यवान  एवम दीर्घकलिक फसल को लगाने से पूर्व सही और पक्का जानकरी प्रप्त कर लेवे और विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही प्लांटेशन करें। और पौधों को अच्छी नर्सरी से ही खरीदे!

हमारी संस्था किसानो को उच्च गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध करने से लेकर, संपूर्ण वैज्ञानिक विधि से उसकी खेती कराने मे किसानो की सहायता करती है। साथ ही विपणन में भी सहायता करती है। नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करके इस संबंध मे आप अपने प्रश्न भी पूछ सकते है।

इस फसल के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें हमारे विशेषज्ञ जल्द ही आपसे संपर्क करेंगे

Published by UMESH KUMAR

15 Year agriculture professional experience, implemented lots of beneficial project to farmers, Currently working as AGRO CUNSULTANT by keeping aim in mind, to spread awareness to promote organic farming, improvement of crop yields, quality of the crops, also serving farmers related to vegetation growth and vegetation quality, agricultural crops, soil composition improvement, fertilizer utilization, crop disease control.

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