सोयाबीन की नई वेरायटी MACS 1407, 1 Hectare में मिलेगी 39 क्विंटल उपज!

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सोयाबीन की वेरायटी तैयार की है जो बंपर उपज देने के साथ कीटों के प्रभाव से बेअसर है. इन नए बीज से किसानों को उत्पादन ज्यादा मिलेगा क्योंकि कीटों का प्रभाव नहीं होने से फसल पुष्ट और सेहतमंद होगी. अगले सीजन से किसानों को इसका बीज मिलना शुरू हो जाएगा.

सोयाबीन की इस नई वेरायटी का नाम एमएसीएस 1407 है. यह नई वेरायटी मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्वी राज्यों की माटी के लिए उपयुक्त होगी. ऐसे तो सभी राज्यों में इसे उगाया जा सकता है लेकिन इन राज्यों की मिट्टी में इसकी उपज ज्यादा होने की संभावना है. रिसर्च में यह बात सामने आई है.

कहां तैयार हुई नई वेरायटी

सोयाबीन की यह नई वेरायटी एमएसीएस (MACS) को पुणे स्थित अघरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है. यह रिसर्च इंस्टीट्यूट भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की स्वायत्त संस्था है. यह संस्थान इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) के तहत काम करता है. इस नई वेरायटी के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्रालय की तरफ से भी जानकारी दी गई है. एक बयान में कहा गया है कि नई वेरायटी के बीच 2022 के खरीफ सीजन में किसानों को उपलब्ध हो सकेंगे.

कैसे तैयार किया नया बीज

सोयाबीन की यह नई वेरायटी क्रॉस ब्रीडिंग टेक्नोलॉजी से तैयार की गई है. इस नई वेरायटी से प्रति हेक्टेयर 39 क्विंटल तक सोयाबीन का उत्पादन मिल सकेगा. सबसे बड़ी बात है कि बंपर पैदावार देने के साथ यह वेरायटी खतरनाक कीटों जैसे गर्डल बीटल, लीफ माइनर, लीफ रोलर, स्टेम फ्लाई, एफिड्स, व्हाइट फ्लाई और डिफोलिएटर्स से बेअसर है.

कैसा होगा पौधा

इसके पौधे की जड़ जमीन से बस 7 सेमी नीचे तक होगी. इससे उपज निकालने में कोई दिक्कत नहीं होगी और यह काम हाथ से भी आसानी से किया जा सकेगा. देश के उत्तर पूर्वी भागों में अच्छी बारिश होती है और वहां पानी की कमी नहीं होती. ऐसे इलाकों के लिए नई वेरायटी उपयुक्त मानी जा रही है. इस वेरायटी को तैयार में लगे एआरआई के वैज्ञानिक संतोष जयभय ने ‘PTI’ से कहा कि अगर अच्छी खेती की जाए, मौसम अनुकूल हो तो 17 परसेंट तक ज्यादा उत्पादन पाया जा सकता है. अगर इसमें थोड़ी कमी हो तो यह उत्पादन 14 परसेंट तक जा सकता है.

कब होगी खेती

इस नई वेरायटी की खेती 20 जून से 5 जुलाई तक कर देनी होगी और इससे कोई उपज की हानि नहीं होगी. अगर इस अवधि में बुवाई कर दें तो मॉनसून का प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा. नई वेरायटी ‘MACS 1407’ बुवाई के बाद फूल देने तक 43 दिन का समय लेता है, जबकि फसल पकने में बुवाई से कुल 104 दिन का समय लगता है. फूल सफेद होता है, बीज पीला होता है तना काले रंग की होती है. इसके बीज में 20 परसेंट तक तेल, 41 परसेंट प्रोटीन पाया जाता है. इसका बीज जल्द अंकुरित भी हो जाता है.

Published by UMESH KUMAR

15 Year agriculture professional experience, implemented lots of beneficial project to farmers, Currently working as AGRO CUNSULTANT by keeping aim in mind, to spread awareness to promote organic farming, improvement of crop yields, quality of the crops, also serving farmers related to vegetation growth and vegetation quality, agricultural crops, soil composition improvement, fertilizer utilization, crop disease control.

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